यीशु, यीशु मेरी डुबत नैय्या बचा लेना (2)
दुनिया के मँवर से मेरी जान बचा लेना (2)
पद 1
दुनिया के सभी मजलूम सुनों
दुःख दर्द में जिन्हें रोना नहीं आता (2)
उन्हें काटना तो आता है, उन्हें बोना नहीं आता (2)
यीशु यीशु मेरी
पद 2
जो आवाज तूने पहाड़ी पे की
वह आवाज बता देना (2)
यीशु यीशु मेरी
"जब यह पंक्ति आती है — “नैय्या” — तो मत्ती 14:30 याद आता है। जब उसने आँधी को देखा तो डरा, और डूबने लगा।"
"जब गीत कहता है — “मँवर” — तो भजन संहिता 69:2 याद आता है। मैं गहरे पानी में डूब गया हूँ।"
"और जब कहा जाता है — “पहाड़ी” — तो मत्ती 5:1 दिल में आता है। वह पहाड़ पर चढ़ गया।"
"यह गीत डुबत नैय्या को बचाने और मँवर से जान बचाने का गीत है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे नैय्या पास आ गई हो।"
"मजलूम, काटना, और आवाज — यही इस गीत की गहराई है।"
"जब नैय्या डुबत हो तो बचा लेना।"
"मँवर से जान बचाओ।"
"मजलूमों को काटना आता है लेकिन बोना नहीं।"
"पहाड़ी की आवाज बता देना।"
"सीख यह है कि यीशु-यीशु पुकारो।"
"इस भजन के शब्द नैय्या को इतनी साफ हिंदी में रखते हैं कि सुनते ही बचाने की प्रार्थना उठती है।"
"आपकी लेखनी लोगों को मँवर और पहाड़ी की ओर खींचती है।"
"इस गीत को आराधना में रखने वाले सबको दिल से आभार। 🙏"
"Thank you for a song that cries for rescue from the storm. ❤️"
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो