यीशु के पीछे हैं चलने लगा, न लौटूंगा, न लौटूंगा
पद 1
संसार को छोड़ कर सलीब को लेके, न लौटूंगा (2)
पद 2
गर कोई मेरे साथ न आवे, न लौटूंगा न लौटूंगा
पद 3
दुनिया के दुःख से नहीं घबराता, खुश रहूंगा (2)
पद 4
अगर मैं उसका इन्कार न करुँ, ताज पाऊंगा (2)
"जब यह पंक्ति आती है — “न लौटूंगा” — तो लूका 9:62 याद आता है। जो कोई हल पर हाथ रखकर पीछे देखता है, वह परमेश्वर के राज्य के योग्य नहीं।"
"जब गीत कहता है — “सलीब को लेके” — तो मत्ती 16:24 याद आता है। यदि कोई मेरे पीछे आना चाहे, तो अपना क्रूस उठाए, और मेरे पीछे हो ले।"
"और जब कहा जाता है — “ताज पाऊंगा” — तो 2 तीमुथियुस 4:8 दिल में आता है। मेरे लिये धर्म का मुकुट रखा हुआ है।"
"यह गीत पीछे न लौटने का निश्चय है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे सलीब पास आ गई हो।"
"अकेला चलना, खुश रहना, और ताज — यही इस गीत की गहराई है।"
"सलीब लेकर आगे चलो।"
"कोई साथ न आए तो भी न लौटो।"
"सीख सीधी है — इन्कार न करो, ताज आगे है।"
"इस सुंदर भजन के लिए दिल से धन्यवाद। आपने न लौटने की बात को इतनी सरल हिंदी में गाया कि आराधना में दिल प्रार्थना में डूब जाता है। आपकी लेखनी और आपकी आवाज़ — दोनों के लिए दिल से आभार। Thank you for giving us a song that touches the heart and leads us into worship."
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो