यीशु आना तू बारम्बार हमारे मन दर्पण में
इसमें रहना तू सालों साल हमारे मन दर्पण में (2)
पद 1
शाम सवेरे यीशु मन में तू आना
घर तू बनाना प्रभु, घर तू बनाना
इसमें रहना तू सालों साल
हमारे मन
पद 2
मूसा को आयो प्रभु एलियाह को आयो
दर्शन दिखायो प्रभु प्रेम दिखायो
यही विनती है बारम्बार
हमारे मन
पद 3
मार्ग बनायो प्रभु पथ दशायो
मीत बनायो प्रभु जीवन दिलायो
जिसमें बहती हैं नदियां हजार
हमारे मन
"जब यह पंक्ति आती है — “मन दर्पण” — तो याकूब 1:23 याद आता है। जो वचन को सुनता है पर उस पर नहीं चलता, वह उस मनुष्य के समान है जो अपना मुँह दर्पण में देखता है।"
"जब गीत कहता है — “मूसा और एलियाह” — तो मत्ती 17:3 याद आता है। मूसा और एलियाह उनके साथ बातें करते हुए दिखाई दिए।"
"और जब कहा जाता है — “नदियां” — तो यूहन्ना 7:38 दिल में आता है। उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियाँ बह निकलेंगी।"
"यह गीत मन दर्पण में आने और रहने का गीत है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे दर्पण पास आ गया हो।"
"शाम, दर्शन, और मार्ग — यही इस गीत की गहराई है।"
"जब बारम्बार आओ तो सालों साल रहो।"
"शाम सवेरे मन में आओ और घर बनाओ।"
"मूसा और एलियाह को दर्शन दो।"
"मार्ग बनाओ और नदियाँ बहाओ।"
"सीख यह है कि मन दर्पण में रहो।"
"इस भजन के शब्द दर्पण को इतनी साफ हिंदी में रखते हैं कि सुनते ही आने की विनती उठती है।"
"आपकी लेखनी लोगों को दर्शन और नदियों की ओर खींचती है।"
"इस गीत को आराधना में रखने वाले सबको दिल से आभार। 🙏"
"Thank you for a song that invites Him into the heart's mirror. ❤️"
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो