यहोवा चरवाहा मेरा, कोई घटी मुझे नहीं है
हरी चराईयों में मुझे, स्नेह से चराता वह है
पद 1
मृत्यु के अन्धकार से मैं जो जाता था
प्रभु यीशु करुणा से तसल्ली मुझे दी है (2)
यहोवा
पद 2
शत्रुओं के सामने, मेज को बिछाता है
प्रभु ने जो तैयार की, मन मेरा मगन है (2)
यहोवा
पद 3
सिर पर तेल मला है, अभिषेक मुझे किया है
दिल मेरा भर गया है, और उमड़ भी रहा है (2)
यहोवा
पद 4
सर्वदा प्रभु घर में, करूँगा निवास जो मैं
करुणा भलाई भी उसकी आनन्दित मुझे करती है (2)
यहोवा
"जब यह पंक्ति आती है — “यहोवा चरवाहा मेरा” — तो भजन संहिता 23:1 याद आता है। यहोवा मेरा चरवाहा है, मुझे कुछ घटी न होगी।"
"जब गीत कहता है — “मेज को बिछाता है” — तो भजन संहिता 23:5 याद आता है। तू मेरे शत्रुओं के सामने मेरे लिये मेज बिछाता है।"
"और जब कहा जाता है — “प्रभु घर में करूँगा निवास” — तो भजन संहिता 23:6 दिल में आता है। मैं यहोवा के धाम में सर्वदा वास करूँगा।"
"यह गीत भजन संहिता 23 की आराधना है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे चराई पास आ गई हो।"
"तसल्ली, मेज, और अभिषेक — यही इस गीत की गहराई है।"
"चरवाहा होने से घटी नहीं रहती।"
"अन्धकार में भी तसल्ली है।"
"सीख सीधी है — उसके घर में निवास रखो।"
"इस सुंदर भजन के लिए दिल से धन्यवाद। आपने चरवाहे को इतनी सरल हिंदी में गाया कि आराधना में दिल प्रार्थना में डूब जाता है। आपकी लेखनी और आपकी आवाज़ — दोनों के लिए दिल से आभार। Thank you for giving us a song that touches the heart and leads us into worship."
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो