विनती मेरी तुझसे है प्रभु जी, कि रहूँ मैं तेरे घर सदा
देखूँगा सुन्दरता तेरी हरदम, और न होऊँगा अब तुझसे जुदा
पद 1
आनन्द ऐसा और कहीं है, यीशु तू ही जीवन की हर खुशी
प्यासा हूँ मैं तेरे लिए, कब मिलूँ मैं तुझसे मसीह
पद 2
आशीषों का तू है सोता, मेरे स्वामी, मेरे त्राता
महिमा का तू है राजा, करता तेरी आराधना
"जब यह पंक्ति आती है — “घर सदा” — तो भजन संहिता 23:6 याद आता है। मैं यहोवा के भवन में सर्वदा वास करूँगा।"
"जब गीत कहता है — “सुन्दरता” — तो भजन संहिता 27:4 याद आता है। एक बात मैं यहोवा से माँगता हूँ।"
"और जब कहा जाता है — “प्यासा” — तो भजन संहिता 42:1 दिल में आता है। जैसे हरिण धाराओं के लिये हांफता है।"
"यह गीत विनती और घर सदा रहने का गीत है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे सुन्दरता पास आ गई हो।"
"आनन्द, प्यासा, और आशीष — यही इस गीत की गहराई है।"
"जब विनती करो तो घर सदा रहो।"
"सुन्दरता देखूँगा और जुदा न होऊँगा।"
"आनन्द और हर खुशी तू ही है।"
"आशीषों का सोता और महिमा का राजा।"
"सीख यह है कि आराधना करो।"
"इस भजन के शब्द विनती को इतनी साफ हिंदी में रखते हैं कि सुनते ही घर की याद आती है।"
"आपकी लेखनी लोगों को सुन्दरता और प्यासा की ओर खींचती है।"
"इस गीत को आराधना में रखने वाले सबको दिल से आभार। 🙏"
"Thank you for a song of longing to dwell in His house forever. ❤️"
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो