उपकार की भेंटे अपनी, प्रभु को चढ़ाना है ×2
पद 1
जो भी हमारा प्रभु का सारा, जिसका उसको देना है ×2
भण्डारी हम प्रभु के जग में, दसवाँ ही लौटाना है ×2
उपकार की भेंटे अपनी...
पद 2
ईश्वर की है कृपा भारी, हमको धन्य मनाना है ×2
हिस्सा दो प्रभु को जो कुछ हो, निज भेंटे भी लाना है ×2
उपकार की भेंटे अपनी...
पद 3
ख्रीष्ट प्रभु ने स्वर्ग को त्यागा, हमको प्रेम दिखाना है ×2
सारा जीवन दे दो प्रभु को, तब आशीषें पाना है ×2
उपकार की भेंटे अपनी...
जब यह पंक्ति आती है — “उपकार की भेंटे अपनी, प्रभु को चढ़ाना है” — तो हाथ रुक जाते हैं। यह बात मलाकी 3:10 की याद दिलाती है। सम्पूर्ण दशमांश भण्डार में ले आओ।
जब गीत कहता है — “ख्रीष्ट प्रभु ने स्वर्ग को त्यागा” — तो फिलिप्पियों 2:7 याद आता है। उसने अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्वरूप धारण किया।
और जब कहा जाता है — “सारा जीवन दे दो प्रभु को” — तो रोमियों 12:1 दिल में आता है। अपने शरीरों को जीवित, पवित्र और भावता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ।
यह गीत केवल चढ़ावे की बात नहीं है। इसके पीछे वही पुराना विश्वास है — जो उसका है, उसे लौटाना आराधना है।
वह स्वर्ग छोड़कर आया, प्रेम दिखाने। आज जब कोई यह गीत गाता है, दिल गिनती छोड़ देता है। यह केवल पुराने समय की बात नहीं, हमारी अपनी कहानी बन जाती है।
किसी घर में एक माँ इसे धीरे गाती है, कोई जवान अपनी भेंट सामने रखता है, और कभी पूरी कलीसिया एक साथ कहती है, प्रभु को चढ़ाना है।
उस पल अलग-अलग हाथ नहीं, एक ही दिल दे रहा होता है। यही इस गीत की खूबसूरती है।
हम अक्सर सोचते हैं कि देने के बाद हमारे पास कम रह जाएगा। यह गीत कहता है, आशीष देने के बाद मिलती है।
यह गीत हमें नुकसान गिनने के लिए नहीं, यह याद दिलाने के लिए है कि जीवन उसका दिया हुआ है।
सीख सीधी है। जीवन का भरोसा केवल अपने पास रखी हुई चीज़ों पर न रखें। जो उसका है, उसे खुशी से दो।
इस सुंदर भजन के लिए दिल से धन्यवाद। आपने देने की बात को इतनी सरल हिंदी में गाया कि आँखें अपने आप झुक जाती हैं। आपकी लेखनी और आपकी आवाज़ — दोनों के लिए दिल से आभार। Thank you for giving us a song that touches the heart and leads us into worship.
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो