तुम तो मसीहा मोरी आँखों के तारे, भूलो न मोरी खबरिया
पद 1
राह बाट हम भूले फिरत हैं, पाप की बांधे गठरिया ×2
हां-हां कहत, तेरी विनती करत हैं, अपनी बता दो डगरिया ×2
पद 2
पाप की नदिया, गहरी बहुत है, लोभ की उछत लहरिया ×2
ले चल, खेवनहारे मसीहा, मोरी तो टूटी नवारिया ×2
पद 3
मन की चादर मैली जो हो गई, जैसे कि काली बदरिया ×2
अपने रक्त में धो दे मसीहा, मन की यह मैली चदरिया ×2
पद 4
यह शैतान बड़ी दुखदाई, मिलकर यह मारे कटरिया ×2
साबिर के अवगुण छिपाओ, बचाओ तोरी तो प्यारी जनरिया ×2
"जब यह पंक्ति आती है — “आँखों के तारे” — तो मन ठहर-सा जाता है। यह बात भजन संहिता 17:8 की याद दिलाती है।"
"जब गीत कहता है — “पाप की बांधे गठरिया” — तो मत्ती 11:28 याद आता है।"
"और जब कहा जाता है — “अपने रक्त में धो दे” — तो प्रकाशितवाक्य 7:14 दिल में आता है।"
"टूटी नैया खेवनहार को पुकार रही है।"
"यह केवल पुराने समय की बात नहीं रह जाती, बल्कि हमारी अपनी कहानी बन जाती है। किसी घर में एक माँ इसे धीरे गाती है, कोई जवान अपनी राह में इसे सुनता है, और कभी पूरी कलीसिया एक साथ गाती है।"
"उस पल लगता है जैसे अलग-अलग आवाज़ें नहीं, एक ही दिल परमेश्वर को पुकार रहा हो। यही इस गीत की खूबसूरती है।"
"भूली राह पर अकेले मत चलो।"
"यह गीत हमें बोझ देने के लिए नहीं, यह याद दिलाने के लिए है कि हम अकेले नहीं हैं।"
"सीख सीधी है। अपना भरोसा केवल अपने ऊपर न रखें।"
"इस सुंदर भजन के लिए दिल से धन्यवाद। आपने इस बात को इतनी सरल हिंदी में गाया कि आराधना में आँखें अपने आप झुक जाती हैं और दिल प्रार्थना में डूब जाता है। आपकी लेखनी और आपकी आवाज़ — दोनों के लिए दिल से आभार। Thank you for giving us a song that touches the heart and leads us into worship."
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो