तुम जगत की ज्योति हो, तुम धरा के नमक भी हो (2)
तुमको पैदा इसलिए किया, तुमको जीवन इसलिए मिला (2)
उसकी मर्जी कर सको सदा
तुम जगत की
पद 1
वह नगर जो बसे शिखर पर, छिपता ही नहीं किसी की नजर (2)
तुम्हारे भले काम चमकें इस तरह
तुम जगत की
पद 2
पड़ोसी से प्रेम तुमने सुना है, दुश्मनों से प्रेम मेरा कहना है (2)
ऐसा जीवन ही पिता को भाता है (2) तभी तुम संतान परमेश्वर समान (2)
तुम जगत की
पद 3
आँख के बदले आँख बुराई का सामना है
फेरो दूसरा नाम पड़ोसी बनना, तभी तुम संतान परमेश्वर समान (2)
तुम जगत की
"जब यह पंक्ति आती है — “ज्योति हो” — तो मत्ती 5:14 याद आता है। तुम जगत की ज्योति हो।"
"जब गीत कहता है — “नमक” — तो मत्ती 5:13 याद आता है। तुम पृथ्वी के नमक हो।"
"और जब कहा जाता है — “प्रेम” — तो मत्ती 5:44 दिल में आता है। अपने शत्रुओं से प्रेम रखो।"
"यह गीत जगत की ज्योति और धरा के नमक होने का गीत है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे चमक पास आ गई हो।"
"नगर, पड़ोसी, और नाम — यही इस गीत की गहराई है।"
"जब ज्योति और नमक हो तो मर्जी कर सको।"
"शिखर पर नगर छिपता नहीं, भले काम चमकें।"
"पड़ोसी से प्रेम सुना है, दुश्मनों से भी प्रेम करो।"
"आँख के बदले आँख मत करो, दूसरा नाम फेरो।"
"सीख यह है कि संतान परमेश्वर समान बनो।"
"इस भजन के शब्द ज्योति को इतनी साफ हिंदी में रखते हैं कि सुनते ही चमकने की इच्छा जागती है।"
"आपकी लेखनी लोगों को नमक और प्रेम की ओर खींचती है।"
"इस गीत को आराधना में रखने वाले सबको दिल से आभार। 🙏"
"Thank you for a song that calls us to be light and salt. ❤️"
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो