तुम दुनिया के नूर हो (2)
चिराग बनके चमको (2)
पद 1
जो शहर ऊँचे पहाड़ों पे बसता है (2)
उसे भला कैसे छुपाया जा सकता है (2)
पद 2
समा जला के कौन उसको छुपाता है (2)
रोशनी से उसके उजाला हो जाता है (2)
पद 3
ऐसे काम कर न सका तुम दुनिया में (2)
तुम में सब तुम्हारे मसीहा को पहचानो (2)
"जब यह पंक्ति आती है — “नूर” — तो मत्ती 5:14 याद आता है। तुम जगत की ज्योति हो।"
"जब गीत कहता है — “चिराग” — तो मत्ती 5:16 याद आता है। तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के सामने चमके।"
"और जब कहा जाता है — “छुपाया” — तो मत्ती 5:15 दिल में आता है। दीया जलाकर पात्र के नीचे नहीं रखते।"
"यह गीत नूर होने और चिराग बनके चमकने का गीत है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे नूर पास आ गया हो।"
"शहर, समा, और पहचानो — यही इस गीत की गहराई है।"
"जब नूर हो तो चिराग बनके चमको।"
"ऊँचे पहाड़ों पे बसता है कैसे छुपाया जा सकता।"
"रोशनी से उजाला हो जाता है।"
"काम करो ताकि मसीहा को पहचानें।"
"सीख यह है कि दुनिया के नूर।"
"इस भजन के शब्द नूर को इतनी साफ हिंदी में रखते हैं कि सुनते ही चमकने की याद आती है।"
"आपकी लेखनी लोगों को शहर और पहचानने की ओर खींचती है।"
"इस गीत को आराधना में रखने वाले सबको दिल से आभार। 🙏"
"Thank you for a song that calls us to shine as light. ❤️"
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो