तेरे लहू से पाप धोता हूँ (2)
तू बढ़ता जा मैं कम होता हूँ (2)
पद 1
तेरा ही नाम सबसे अच्छा है, अपनी खुदी से हाथ धोता हूँ (2)
तू बढ़ता जा मैं कम होता हूँ (2)
पद 2
तेरा लहू है मेल का पैगाम, तेरे लहू से सब चैन आराम
तेरे लहू से सब बने बिगड़े काम, खुद को लहू में डुबोता हूँ (2)
तू बढ़ता जा मैं कम होता हूँ (2)
पद 3
तेरा कलाम जीवन की रोटी, तेरा कलाम राहों की ज्योति
तेरा कलाम है असीम मोती, दिल की माला मैं पिरोता हूँ
तू बढ़ता जा मैं कम होता हूँ (2)
"जब यह पंक्ति आती है — “लहू से” — तो 1 यूहन्ना 1:7 याद आता है। उसके पुत्र यीशु का लहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है।"
"जब गीत कहता है — “कम होता हूँ” — तो यूहन्ना 3:30 याद आता है। अवश्य है कि वह बढ़े और मैं घटूँ।"
"और जब कहा जाता है — “कलाम” — तो यूहन्ना 1:1 दिल में आता है। आदि में वचन था।"
"यह गीत लहू से धोने और कम होने का गीत है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे लहू पास आ गया हो।"
"नाम, पैगाम, और माला — यही इस गीत की गहराई है।"
"जब लहू से धोओ तो बढ़ता जा और कम हो।"
"नाम अच्छा है और खुदी से हाथ धोओ।"
"लहू मेल का पैगाम है और बिगड़े काम बनते हैं।"
"कलाम रोटी और ज्योति है।"
"सीख यह है कि दिल की माला पिरोओ।"
"इस भजन के शब्द लहू को इतनी साफ हिंदी में रखते हैं कि सुनते ही कम होने की इच्छा जागती है।"
"आपकी लेखनी लोगों को पैगाम और कलाम की ओर खींचती है।"
"इस गीत को आराधना में रखने वाले सबको दिल से आभार। 🙏"
"Thank you for a song that decreases self and increases Him. ❤️"
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो