स्तुति करूँगा मैं प्यारे मसीहा
हाथ अपने उठाकर सदा (2)
पद 1
नगमें गाऊँगा मैं प्यारे मसीहा
हाथ अपने उठाकर सदा (2)
स्तुति करूँगा
पद 2
सेवा करूँगा मैं प्यारे मसीहा
हाथ अपने उठाकर सदा (2)
स्तुति करूँगा
पद 3
भजन करूँगा मैं प्यारे मसीहा
हाथ अपने उठाकर सदा (2)
स्तुति करूँगा
पद 4
प्रार्थना करूँगा मैं प्यारे मसीहा
हाथ अपने उठाकर सदा (2)
स्तुति करूँगा
"जब यह पंक्ति आती है — “स्तुति” — तो भजन संहिता 100:4 याद आता है। उसके फाटकों में धन्यवाद के साथ प्रवेश करो।"
"जब गीत कहता है — “हाथ” — तो भजन संहिता 63:4 याद आता है। मैं अपने हाथ उठाकर तेरे नाम की स्तुति करूँगा।"
"और जब कहा जाता है — “सेवा” — तो कुलुस्सियों 3:23 दिल में आता है। जो कुछ भी करो, तन मन से करो।"
"यह गीत स्तुति करने और हाथ उठाने का गीत है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे स्तुति पास आ गई हो।"
"नगम, सेवा, और प्रार्थना — यही इस गीत की गहराई है।"
"जब स्तुति करो तो हाथ उठाकर सदा।"
"नगम गाओ और सेवा करो।"
"भजन और प्रार्थना करो।"
"सीख यह है कि हाथ उठाओ।"
"इस भजन के शब्द स्तुति को इतनी साफ हिंदी में रखते हैं कि सुनते ही हाथ उठाने की याद आती है।"
"आपकी लेखनी लोगों को नगम और सेवा की ओर खींचती है।"
"इस गीत को आराधना में रखने वाले सबको दिल से आभार। 🙏"
"Thank you for a song of praise with raised hands. ❤️"
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो