सम्भाल प्रभु जी जीवन के हर पल में
अभी तक हमको सम्भाला तूने आगे भी अगुवाई कर
पद 1
जैसे मुर्गी बच्चों को, पंखों तले छिपाती
वैसे ही तेरी छाया, शरण गढ़ है हमारी
पद 2
वायदा यह तूने किया, छोड़े न कभी मुझे
खींचा है रूप मेरा हथेली पर अपनी
पद 3
सनातन के यहोवा तू ही हमारा गढ़ है
तेरे वचन से हमारे जीवन की ज्योति जले
पद 4
हे यीशु तेरा यह प्यार, वर्णन से है अपार
हाथों से हाथ मिलाया आसमानी बाप से हमको
"जब यह पंक्ति आती है — “पंखों तले छिपाती” — तो मत्ती 23:37 याद आता है। जैसे मुर्गी अपने बच्चों को पंखों के नीचे इकट्ठा करती है।"
"जब गीत कहता है — “हथेली पर अपनी” — तो यशायाह 49:16 याद आता है। देख, मैंने तुझे अपनी हथेलियों पर खोद रखा है।"
"और जब कहा जाता है — “छोड़े न कभी मुझे” — तो इब्रानियों 13:5 दिल में आता है। मैं तुझे कभी न छोड़ूँगा, और न कभी त्यागूँगा।"
"यह गीत हर पल सम्भालने और आगे अगुवाई करने की प्रार्थना है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे छाया पास आ गई हो।"
"गढ़, हथेली, और ज्योति — यही इस गीत की गहराई है।"
"अब तक सम्भाला है, आगे भी अगुवाई करेगा।"
"रूप हथेली पर है।"
"सीख सीधी है — वचन से ज्योति जलने दो।"
"इस सुंदर भजन के लिए दिल से धन्यवाद। आपने सम्भाल को इतनी सरल हिंदी में गाया कि आराधना में दिल प्रार्थना में डूब जाता है। आपकी लेखनी और आपकी आवाज़ — दोनों के लिए दिल से आभार। Thank you for giving us a song that touches the heart and leads us into worship."
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो