प्यासे हैं, प्यास बुझा
चश्मे बहा एशु चश्मे बहा (२)
दे सिफ़ा तू बीमारो को, सिफ़ा का तू है दरिया..
प्यासे हैं, प्यास बुझा
चश्मे बहा एशु चश्मे बहा (२)
पद 1
जंगल में जिसने पिलाया, अमृत जल बनके वो आया (२)
अमृत जल्दी पिला सिफ़ा का तू है दरिया
प्यासे हैं, प्यास बुझा
चश्मे बहा एशु चश्मे बहा (२)
पद 2
जीवन जल का तू ही सोता, बहती नदिया जो तू होता (२)
बहने दें मुझमें मसा, सिफ़ा का तू है दरिया
प्यासे हैं, प्यास बुझा
चश्मे बहा एशु चश्मे बहा (२)
पद 3
ज़ख़्मों को एशु ही भरता, सब रोगों को चंगा करता (२)
वो है ज़िंदा ख़ुदा, सिफ़ा तू है दरिया
प्यासे हैं, प्यास बुझा
चश्मे बहा एशु चश्मे बहा (२)
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो