पद 1
प्रेमी मसीह के प्रेम बराबर, प्रेमी है कोई नहीं (2)
बना वह मुजरिम, प्रेम से जान दी अपनी
प्रेम से दी है तसल्ली (2) प्रेम नगर में विराजा
पद 2
प्रेमी मसीह के प्रेम के लिए, दिल में जगह है नहीं (2)
प्रेम के जो है बैरी, प्रेम से आँख चुरानी
कब लग दूर रहेगा, सुन्दर समय खोएगा
पद 3
होवे कैसा पापी ऐ भाई, प्रेम वह करता तुझे (2)
पापों का भार तू लाकर, चरणों में शीश नवा दे
मुक्तिदाता है यीशु, सच है बचाता यीशु
"जब यह पंक्ति आती है — “प्रेमी है कोई नहीं” — तो यूहन्ना 15:13 याद आता है। इससे बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे।"
"जब गीत कहता है — “प्रेम से जान दी अपनी” — तो रोमियों 5:8 याद आता है। जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा।"
"और जब कहा जाता है — “चरणों में शीश नवा दे” — तो मत्ती 11:28 दिल में आता है। हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ।"
"यह गीत मसीह के उस प्रेम का है जिसके बराबर कोई प्रेमी नहीं।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे प्रेम नगर पास आ गया हो।"
"जान देना, तसल्ली, और शीश नवा देना — यही इस गीत की गहराई है।"
"मसीह का प्रेम सबसे बड़ा है।"
"आँखें चुराकर दूर न रहो।"
"सीख सीधी है — पापों का भार लाकर चरणों में शीश नवा दो।"
"इस सुंदर भजन के लिए दिल से धन्यवाद। आपने मसीह के प्रेम को इतनी सरल हिंदी में गाया कि आराधना में दिल प्रार्थना में डूब जाता है। आपकी लेखनी और आपकी आवाज़ — दोनों के लिए दिल से आभार। Thank you for giving us a song that touches the heart and leads us into worship."
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो