प्रभु यीशु मेरे, स्वामी मन के, तुम प्रेम मिलन को आ जाओ
मैं था भटका राही जीवन में, तुम राह नई दिखला जाओ
पद 1
ये जीवन पग-पग उजड़ा है, हर पग-पग में अंधेरा है
तुम ज्योति बनो मेरे मन की, और मन में ज्योति जला जाओ
पद 2
ये जीवन कण-कण बिखरा है, और पाप का इसमें बसेरा है
दो अपने से वरदान मुझे, और प्रेम का राग सिखा जाओ
पद 3
सोचा न कभी यह भी हमने, कितने ही कष्ट सहे तुमने
शैतान ने फँसाया फन्दे में, तुम आ के जरा सुलझा जाओ
पद 4
ये मन तुम बिन अब प्यासा है, राह ताकते नैन सुलगते हैं
तुम, तृप्त करो जीवन जल से, और मन की प्यास बुझा जाओ
"जब यह पंक्ति आती है — “ज्योति जला जाओ” — तो यूहन्ना 8:12 याद आता है। जगत की ज्योति मैं हूँ।"
"जब गीत कहता है — “कष्ट सहे तुमने” — तो यशायाह 53:4 याद आता है। निश्चय उसने हमारे ही रोगों को सह लिया।"
"और जब कहा जाता है — “प्यास बुझा जाओ” — तो यूहन्ना 4:14 दिल में आता है। जो कोई उस जल में से पिएगा जो मैं उसे दूँगा, वह फिर कभी प्यासा न होगा।"
"यह गीत भटके राही की प्रेम मिलन की पुकार है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे राह पास आ गई हो।"
"ज्योति, फन्दा, और प्यास — यही इस गीत की गहराई है।"
"अंधेरे में ज्योति वही जलाता है।"
"फन्दे को वह सुलझाता है।"
"सीख सीधी है — जीवन जल से प्यास बुझती है।"
"इस सुंदर भजन के लिए दिल से धन्यवाद। आपने मिलन की पुकार को इतनी सरल हिंदी में गाया कि आराधना में दिल प्रार्थना में डूब जाता है। आपकी लेखनी और आपकी आवाज़ — दोनों के लिए दिल से आभार। Thank you for giving us a song that touches the heart and leads us into worship."
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो