पाखण्डी दुनिया प्रभु के बिना कौन तारे (2)
पद 1
भूखों को रोटी न देवे, सब तीरथ करि आवे रे (2)
धन सम्पत्ति सब वहीं लगावे, बीबी देत दुहाई रे
पद 2
अपने-अपने की सब पूंछे, दुखियों की न पूंछे रे (2)
ऐसे हैं सब इस दुनिया के, मतलब की दुनिया रे
पद 3
नारी को सब जूती समझे, जिससे जन्म लिया भक्तों ने (2)
सोच-समझ ले अब तू बन्दे, इसका न्याय सभी होगा
पद 4
ईसा को दिल में अपना लो, प्रेम करन को सीखो रे (2)
भाई-बहन को गले लगाकर, उसके ही पथ पर चलना सीखो
"जब यह पंक्ति आती है — “भूखों को रोटी” — तो मत्ती 25:35 याद आता है। मैं भूखा था, तुमने मुझे खाने को दिया।"
"जब गीत कहता है — “दुखियों की न पूंछे” — तो याकूब 1:27 याद आता है। पवित्र और निर्मल भक्ति यह है कि अनाथों और विधवाओं की सहायता करे।"
"और जब कहा जाता है — “प्रेम करन को सीखो” — तो यूहन्ना 13:34 दिल में आता है। एक दूसरे से प्रेम रखो।"
"यह गीत पाखण्डी दुनिया और प्रभु के बिना तारने की बात करता है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे न्याय पास आ गया हो।"
"रोटी, दुखिया, और प्रेम — यही इस गीत की गहराई है।"
"तीरथ और धन से तार नहीं होता।"
"दुखियों को पूछो, नारी को सम्मान दो।"
"सीख सीधी है — ईसा को दिल में लो, प्रेम सीखो।"
"इस भजन के शब्द पाखण्ड को इतनी साफ हिंदी में उजागर करते हैं कि सुनते ही सोचने पर मजबूर हो जाते हैं।"
"आपकी लेखनी लोगों को भूखों, दुखियों और प्रेम की ओर खींचती है।"
"इस गीत को आराधना में रखने वाले सबको दिल से आभार। 🙏"
"Thank you for a song that exposes hypocrisy and calls us to love. ❤️"
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो