पाक रूह ने मुझको, जीना सिखा दिया (2)
मुर्दा था मैं गुनाह में, मुझको जिला दिया
पद 1
तौबा कबूल करके, मेरी तू साफिया
मुझे अब्दी जिन्दगी का, तूने सिला दिया
पाक रूह
पद 2
जंगल में जब गुनाह से, राही था चूर-चूर
तेरी रहमतों ने मुझको, रस्ता दिखा दिया
पाक रूह
"जब यह पंक्ति आती है — “पाक रूह” — तो प्रेरितों के काम 2:4 याद आता है। वे सब पवित्र आत्मा से भर गए।"
"जब गीत कहता है — “जिला दिया” — तो इफिसियों 2:5 याद आता है। जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया।"
"और जब कहा जाता है — “तौबा” — तो प्रेरितों के काम 3:19 दिल में आता है। मन फिराओ और लौट आओ।"
"यह गीत पाक रूह से जीना सीखने और जिलाने का गीत है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे रूह पास आ गई हो।"
"तौबा, जंगल, और रस्ता — यही इस गीत की गहराई है।"
"जब पाक रूह आए तो जीना सिखाए और जिलाए।"
"तौबा कबूल करके साफिया।"
"जंगल में चूर-चूर था तो रस्ता दिखाया।"
"सीख यह है कि अब्दी जिन्दगी का सिला मिला।"
"इस भजन के शब्द पाक रूह को इतनी साफ हिंदी में रखते हैं कि सुनते ही जीना सीखने की याद आती है।"
"आपकी लेखनी लोगों को तौबा और रस्ते की ओर खींचती है।"
"इस गीत को आराधना में रखने वाले सबको दिल से आभार। 🙏"
"Thank you for a song that shows the Spirit giving life. ❤️"
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो