ओ आकाश और सूर्य चन्द्रमा, स्तुति करो शमा भूमण्डल (2)
पद 1
यीशु ने तुझसे प्रेम किया, तेरे लिए अपना प्राण दिया (2)
नरक से आत्मा को बचा लिया, अनंत जीवन सबको दिया
ओ आकाश
पद 2
अनुग्रह कारी प्रिय यीशु, धर्मी होकर वह दुःख सहा (2)
हरा दिया बैरी शैतान को, मृत्यु पर यीशु विजयी हुआ
ओ आकाश
पद 3
दूतों ने सुनाया सुसमाचार, यीशु जी उठा है जरूर (2)
जाके बताओ यह समाचार, बाजे बजाते गाते जय जयकार
ओ आकाश
"जब यह पंक्ति आती है — “आकाश और सूर्य” — तो भजन संहिता 148:3 याद आता है। हे सूर्य और चन्द्रमा, उसकी स्तुति करो।"
"जब गीत कहता है — “प्राण दिया” — तो यूहन्ना 15:13 याद आता है। इससे बड़ा प्रेम किसी का नहीं कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे।"
"और जब कहा जाता है — “विजयी” — तो 1 कुरिन्थियों 15:55 दिल में आता है। हे मृत्यु, तेरी जय कहाँ रही।"
"यह गीत आकाश और सूर्य को स्तुति करने का गीत है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे स्तुति पास आ गई हो।"
"प्रेम, दुःख, और समाचार — यही इस गीत की गहराई है।"
"जब आकाश और सूर्य स्तुति करें तो शमा भूमण्डल भी करे।"
"प्रेम किया और प्राण दिया।"
"दुःख सहा और शैतान को हराया।"
"दूतों ने सुसमाचार सुनाया।"
"सीख यह है कि जय जयकार गाओ।"
"इस भजन के शब्द आकाश को इतनी साफ हिंदी में रखते हैं कि सुनते ही स्तुति की याद आती है।"
"आपकी लेखनी लोगों को प्रेम और विजय की ओर खींचती है।"
"इस गीत को आराधना में रखने वाले सबको दिल से धन्यवाद। 🙏"
"Thank you for a song that calls creation to praise. ❤️"
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो