मुश्किलें कितनी भी हो असम्भव कुछ भी नहीं
राह कितने भी हो कठिन मंजिल एक दिन आयेगी
पद 1
कारावास या शेरों की माँद, न रोक सके प्रभु का हाथ
हुकूमत की साजिशें न रोक सकीं आशीषें (2)
मुश्किलें कितनी भी
पद 2
ये पहाड़ उखड़ जायेंगे, समुद्र में पड़ जायेंगे
विश्वास यदि हो अटल, जो कहोगे वह होगा सफल (2)
मुश्किलें कितनी भी
पद 3
विश्वास से जो बोलोगे, आँखों से वही देखोगे
विश्वास का हर वचन, पूरा होगा टलेगा नहीं (2)
मुश्किलें कितनी भी
"जब यह पंक्ति आती है — “असम्भव कुछ भी नहीं” — तो लूका 1:37 याद आता है। क्योंकि परमेश्वर से कोई बात असम्भव नहीं।"
"जब गीत कहता है — “पहाड़ उखड़ जायेंगे” — तो मत्ती 17:20 याद आता है। यदि तुम्हें राई के दाने के बराबर भी विश्वास हो, तो तुम इस पहाड़ से कहोगे, यहाँ से सरककर वहाँ चला जा, तो वह चला जाएगा।"
"और जब कहा जाता है — “विश्वास का हर वचन” — तो मरकुस 11:23 दिल में आता है। जो कोई इस पहाड़ से कहे, उखड़ जा और समुद्र में जा पड़, और अपने मन में सन्देह न करे, परन्तु प्रतीति करे कि जो वह कहता है वह हो जाएगा, तो उसके लिये वही हो जाएगा।"
"यह गीत मुश्किलों में अटल विश्वास का गीत है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे मंजिल पास आ गई हो।"
"कारावास, पहाड़, और वचन — यही इस गीत की गहराई है।"
"मुश्किलें प्रभु का हाथ नहीं रोकतीं।"
"अटल विश्वास से पहाड़ उखड़ते हैं।"
"सीख सीधी है — विश्वास का वचन पूरा होता है।"
"इस भजन के बोल मुश्किलों को इतनी हिम्मत वाली हिंदी में रखते हैं कि सुनते ही विश्वास जागता है।"
"आपकी लेखनी लोगों को कारावास और पहाड़ों के बीच भी अटल रहने की शक्ति देती है।"
"इस गीत को आराधना में रखने वाले सबको दिल से आभार। 🙏"
"Thank you for a song that strengthens faith in hard times. ❤️"
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो