मेरो मन लागो (2) यीशु जी के ध्यान, प्रभु जी के ध्यान
पद 1
प्रेम की तेरी रीति निराली (2) तेरी निराली शान (2)
पद 2
पापिन कारण क्रूस उठाई (2) दे दी अपनी जान (2)
पद 3
जो प्रभु तेरी शरण में आया (2) बच गए उसके प्राण (2)
पद 4
जिसने तेरा दामन छुआ (2) पाई शिफा उसी आन (2)
पद 5
बिनती हमारी सुनिये यीशु जी (2) दीजो अपना ज्ञान (2)
"जब यह पंक्ति आती है — “यीशु जी के ध्यान” — तो इब्रानियों 12:2 याद आता है। विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर देखें।"
"जब गीत कहता है — “दे दी अपनी जान” — तो यूहन्ना 15:13 याद आता है। इससे बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे।"
"और जब कहा जाता है — “दामन छुआ” — तो मरकुस 5:28 दिल में आता है। यदि मैं उसके वस्त्रों को छू भी लूँ, तो चंगी हो जाऊँगी।"
"यह गीत मन को यीशु के ध्यान में लगाने का गीत है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे ध्यान पास आ गया हो।"
"निराली रीति, शरण, और शिफा — यही इस गीत की गहराई है।"
"मन उसके ध्यान में लगे।"
"शरण में आने वाले बच जाते हैं।"
"सीख सीधी है — दामन छुओ, ज्ञान माँगो।"
"इस सुंदर भजन के लिए दिल से धन्यवाद। आपने ध्यान की पुकार को इतनी सरल हिंदी में गाया कि आराधना में दिल प्रार्थना में डूब जाता है। आपकी लेखनी और आपकी आवाज़ — दोनों के लिए दिल से आभार। Thank you for giving us a song that touches the heart and leads us into worship."
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो