Prabhu Yeshu Ke Charanon Se Bhatak Kar Main Kahan Jaun - प्रभु यीशु के चरणों से भटक कर मैं कहाँ जाऊँ
टेक
प्रभु यीशु के चरणों से भटक कर मैं कहाँ जाऊँ (2)
पद 1
मैं हर्षित मन से आता हूँ, हृदय की भेंट लाता हूँ (2)
बीते दिनों में हे प्रभु (2) तूने मुझको सम्भाला है
पद 2
अनुग्रह का वचन देकर प्रभु तू ही ले आया है (2)
संकट क्लेश में साथी बनकर (2) प्रभु तू ही ले आया है
पद 3
अनुग्रह के सिंहासन से, बिनती प्रभु मेरी सुन ले (2)
हर एक घड़ी, और हर एक पल में (2) प्रभु भय मानूं तेरा मैं
पद 4
प्रभु यीशु मैं आता हूँ जीवन अर्पण मैं करता हूँ (2)
मेरे जीवन से हे प्रभु (2) सेवा अपनी करा ले तू
"जब यह पंक्ति आती है — “चरणों से भटक कर मैं कहाँ जाऊँ” — तो यूहन्ना 6:68 याद आता है। प्रभु, हम किसके पास जाएँ? अनन्त जीवन की बातें तो तेरे ही पास हैं।"
"जब गीत कहता है — “हृदय की भेंट लाता हूँ” — तो भजन संहिता 51:17 याद आता है। भग्न और पिसे हुए मन का बलिदान तू तुच्छ नहीं जानता।"
"और जब कहा जाता है — “जीवन अर्पण मैं करता हूँ” — तो रोमियों 12:1 दिल में आता है। अपनी देहों को जीवित, पवित्र और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ।"
"यह गीत उस दिल की पुकार है जो चरणों से भटककर और कहीं नहीं जाना चाहता।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे चरण पास आ गए हों।"
"हर्षित भेंट, संकट में साथ, और जीवन अर्पण — यही इस गीत की गहराई है।"
"चरणों से भटककर जाने की जगह नहीं।"
"बीते दिनों में उसने सम्भाला है।"
"सीख सीधी है — जीवन अर्पण करो, और सेवा करने दो।"
"इस सुंदर भजन के लिए दिल से धन्यवाद। आपने चरणों की पुकार को इतनी सरल हिंदी में गाया कि आराधना में दिल प्रार्थना में डूब जाता है। आपकी लेखनी और आपकी आवाज़ — दोनों के लिए दिल से आभार। Thank you for giving us a song that touches the heart and leads us into worship."
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो