मैं आँखें अपनी पर्वत की ओर लगाऊँगा
मुझको है पता सहायता वही से पाऊँगा
नीचे धरती, ऊपर आसमान बनाया है
परमेश्वर है वह उसके गुण गाऊँगा (2)
मैं अपनी आँखें
पद 1
फिसले न कभी कदम राहों में
इसलिए न सोता दिन रातों में (2)
इज्राएल का वह है रखवाला
ऊँघेगा न सोयेगा (2)
मैं अपनी आँखें
पद 2
कष्टों से यीशु मुझे बचायेगा
रक्षक बनकर प्राण सम्भालेगा (2)
बाहर जाओ या अन्दर आओ
वही हमेशा रक्षक होगा (2)
मैं अपनी आँखें
"जब यह पंक्ति आती है — “पर्वत की ओर” — तो भजन संहिता 121:1 याद आता है। मैं अपनी आँखें पर्वतों की ओर लगाऊँगा।"
"जब गीत कहता है — “रखवाला” — तो भजन संहिता 121:4 याद आता है। देख, जो इज्राएल का रक्षक है वह न ऊँघेगा और न सोएगा।"
"और जब कहा जाता है — “रक्षक” — तो भजन संहिता 121:5 दिल में आता है। यहोवा तेरा रक्षक है।"
"यह गीत आँखें पर्वत की ओर लगाने और सहायता पाने का गीत है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे पर्वत पास आ गया हो।"
"कदम, रखवाला, और प्राण — यही इस गीत की गहराई है।"
"जब आँखें पर्वत की ओर लगाओ तो सहायता पाओगे।"
"नीचे धरती ऊपर आसमान बनाया।"
"कदम न फिसले और न सोए।"
"रक्षक बनकर प्राण सम्भालेगा।"
"सीख यह है कि गुण गाओ।"
"इस भजन के शब्द आँखें को इतनी साफ हिंदी में रखते हैं कि सुनते ही पर्वत की याद आती है।"
"आपकी लेखनी लोगों को सहायता और रक्षक की ओर खींचती है।"
"इस गीत को आराधना में रखने वाले सबको दिल से आभार। 🙏"
"Thank you for a song that lifts eyes to the hills. ❤️"
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो