क्यों मन भूला है यह संसार (2)
मन मत दे टुक कर ले गुजारा
पद 1
इस जग में सुख नित नहीं भाई (2)
यह तो है जैसे पानी की धारा (2)
क्यों
पद 2
माता-पिता और खेस कुटुम्ब सब
संग नहीं कोई जावन हारा (2)
क्यों
पद 3
अंत समय सब देखन अई है
क्षण भर में सब हुई है नियारा (2)
क्यों
पद 4
जो कुछ अंग में होगा तुम्हारा
वह भी सब मिल लेई है उतारा (2)
क्यों
पद 5
नरक अग्नि में जब तुम पड़ियो
तब नहीं कोई बचावन हारा (2)
क्यों
पद 6
भाई मुक्ति की खोज करो तुम
यीशु मसीह प्रभु तारणहारा (2)
क्यों
पद 7
आसी तो प्रभु दास तुम्हारा
तुम बिन नाहीं और कोई हमारा (2)
क्यों
"जब यह पंक्ति आती है — “पानी की धारा” — तो याकूब 4:14 याद आता है। तुम्हारा जीवन भाप के समान है।"
"जब गीत कहता है — “संग नहीं कोई” — तो भजन संहिता 49:17 याद आता है। वह मरने पर कुछ भी न ले जाएगा।"
"और जब कहा जाता है — “तारणहारा” — तो 1 तीमुथियुस 1:15 दिल में आता है। मसीह यीशु पापियों का उद्धार करने के लिये जगत में आया।"
"यह गीत भूले संसार से मन हटाकर तारणहारा की ओर बुलाने का गीत है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे खोज पास आ गई हो।"
"धारा, नियारा, और मुक्ति — यही इस गीत की गहराई है।"
"सुख नित नहीं रहता।"
"अन्त समय सब न्यारा हो जाता है।"
"सीख सीधी है — मुक्ति की खोज करो, तारणहारा वही है।"
"इस सुंदर भजन के लिए दिल से धन्यवाद। आपने संसार की बात को इतनी सरल हिंदी में गाया कि आराधना में दिल प्रार्थना में डूब जाता है। आपकी लेखनी और आपकी आवाज़ — दोनों के लिए दिल से आभार। Thank you for giving us a song that touches the heart and leads us into worship."
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो