कोई तुम्हें बुला रहा, एक नजर तो मोड़ लो
क्यों रे मुनाह लिए चले, उनको यहीं पर छोड़ दो
पद 1
रुक के जरा तो सोचो तुम, मरने के बाद होगा क्या (2)
मिले तुम्हें जो जिन्दगी, प्रभु को उसे दोगे क्या (2)
ले लो तुम जिन्दगी नई, नये कदम भी मोड़ लो
पद 2
राहें हैं जिन्दगी की दो, जिस पर सभों को चलना है (2)
दुनिया की राहों में चल रहे, या राहे मसीही चलना है
अब तुम नये इन्सान बनो, दुनिया से रिश्ता तोड़ दो
पद 3
देखो कोई सलीब से, तुमको अभी बुला रहा (2)
अपने पिता से जिन्दगी, नई तुम्हें दिला रहा
आ जाओ तुम सलीब से, अपना भी नाता जोड़ लो
"जब यह पंक्ति आती है — “बुला रहा” — तो यशायाह 55:1 याद आता है। हे सब प्यासे लोगों, पानी के पास आओ।"
"जब गीत कहता है — “मरने के बाद” — तो इब्रानियों 9:27 याद आता है। मनुष्यों के लिये एक बार मरना और उसके बाद न्याय का होना नियुक्त है।"
"और जब कहा जाता है — “सलीब” — तो गलातियों 6:14 दिल में आता है। मैं हमारे प्रभु यीशु मसीह के क्रूस के सिवा और किसी बात पर घमण्ड न करूँ।"
"यह गीत बुला रहा है और नजर मोड़ने का गीत है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे नजर पास आ गई हो।"
"मुनाह, राहें, और नाता — यही इस गीत की गहराई है।"
"जब बुला रहा हो तो नजर मोड़ो।"
"मरने के बाद क्या होगा सोचो।"
"जिन्दगी दो और नई ले लो।"
"राहें दो हैं, मसीही चलो।"
"सीख यह है कि सलीब से नाता जोड़ो।"
"इस भजन के शब्द बुला रहा को इतनी साफ हिंदी में रखते हैं कि सुनते ही नजर मोड़ने की याद आती है।"
"आपकी लेखनी लोगों को नई जिन्दगी और सलीब की ओर खींचती है।"
"इस गीत को आराधना में रखने वाले सबको दिल से आभार। 🙏"
"Thank you for a song that turns the gaze toward the cross. ❤️"
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो