कलवरी पर यीशु मुआ ×2
वहाँ जीवन का सोता बहा ×2
पापी प्यास तू अपनी बुझा ×2
पद 1
उसके पंजर में माला छिदा, उसके हाथों में कीले ठुकी
उसने क्या-क्या दुःख न सहा
कलवरी...
पद 2
उसके लहू से ले तू नहा, साफ होंगे तेरे गुनाह
वह सबके लिये मुआ
कलवरी...
पद 3
हे पापियों तुम भी पियो, हे धर्मियों तुम भी पियो
वह सबके लिए है बहा
कलवरी...
जब यह पंक्ति आती है — “कलवरी पर यीशु मुआ” — तो मन ठहर-सा जाता है। यह बात यूहन्ना 19:17-18 की याद दिलाती है। वे उसे गोलगथा ले गए, और वहाँ उसे क्रूस पर चढ़ाया।
जब गीत कहता है — “वहाँ जीवन का सोता बहा” — तो यूहन्ना 19:34 याद आता है। उसके पंजर में भाला छिदा, और लहू और पानी बह निकला।
और जब कहा जाता है — “पापी प्यास तू अपनी बुझा” — तो यूहन्ना 7:37 दिल में आता है। यदि कोई प्यासा हो, तो मेरे पास आकर पिए।
यह गीत केवल एक पुराने दिन की खबर नहीं है। इसके पीछे वही विश्वास है — क्रूस दर्द था, पर वहाँ से जीवन बह निकला। वह अपने लोगों को नहीं भूला।
कीले, काँटे, और फिर भी सबके लिए बहा। यह केवल पुराने समय की बात नहीं रह जाती, बल्कि हमारी अपनी कहानी बन जाती है।
किसी घर में एक माँ इसे धीरे गाती है, कोई जवान अपनी प्यास में इसे सुनता है, और कभी पूरी कलीसिया चुप होकर कहती है, वह सबके लिये मुआ।
उस पल लगता है जैसे अलग-अलग आवाज़ें नहीं, एक ही दिल क्रूस के सामने झुक रहा हो। यही इस गीत की खूबसूरती है।
हम अक्सर सोचते हैं कि अपनी अच्छाई से राह पार कर लेंगे। यह गीत कहता है, सोता कलवरी पर बहा है। प्यास उसी से बुझती है।
यह गीत हमें दर्द दिखाने के लिए नहीं, यह याद दिलाने के लिए है कि जीवन का सोता वहीं से बहता है।
सीख सीधी है। अपने ऊपर भरोसा न रखें। क्रूस को याद रखें, और कहें — यीशु, तेरे बिना मैं कुछ भी नहीं।
इस सुंदर भजन के लिए दिल से धन्यवाद। आपने कलवरी की बात को इतनी सरल हिंदी में गाया कि आराधना में आँखें अपने आप झुक जाती हैं और दिल प्रार्थना में डूब जाता है। आपकी लेखनी और आपकी आवाज़ — दोनों के लिए दिल से आभार। यह गीत बहुतों के लिए सिर्फ एक भजन नहीं, बल्कि एक प्रार्थना बन गया है। Thank you for giving us a song that touches the heart and leads us into worship.
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो