कैसे कनान देश जाऊँ रे, अनजानी डगरिया (2)
पद 1
सेना फिरौन लिए पीछे पड़ो है, आगे समुद्र लाल बहुतै बड़ो है
बीच बना दो डगरिया, अनजानी डगरिया
पद 2
दिन में बादल की छाव बनाये देव
रात में अग्नि का खम्भा दिखाये देव
मार्ग में कर दो उजरिया, अनजानी डगरिया
पद 3
जंगल घनो है प्रभु, रास्ता दिखाये देव
राह कठिन प्रभु आकर बताये देव
भटकू न यीशु नसरिया, अनजानी डगरिया
"जब यह पंक्ति आती है — “समुद्र लाल” — तो निर्गमन 14:21 याद आता है। यहोवा ने रात भर पुरवाई हवा से समुद्र को हटा दिया।"
"जब गीत कहता है — “बादल की छाव” — तो निर्गमन 13:21 याद आता है। यहोवा दिन को बादल के खम्भे में होकर उन्हें मार्ग दिखाता था।"
"और जब कहा जाता है — “अग्नि का खम्भा” — तो निर्गमन 13:21 दिल में आता है। रात को आग के खम्भे में होकर उजियाला देता था।"
"यह गीत अनजानी डगरिया पर कनान देश जाने का गीत है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे डगरिया पास आ गई हो।"
"लाल समुद्र, खम्भा, और जंगल — यही इस गीत की गहराई है।"
"पीछे फिरौन है, आगे समुद्र है।"
"दिन में छाव, रात में अग्नि।"
"सीख सीधी है — यीशु नसरिया भटकने नहीं देता।"
"इस सुंदर भजन के लिए दिल से धन्यवाद। आपने डगरिया को इतनी सरल हिंदी में गाया कि आराधना में दिल प्रार्थना में डूब जाता है। आपकी लेखनी और आपकी आवाज़ — दोनों के लिए दिल से आभार। Thank you for giving us a song that touches the heart and leads us into worship."
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो