जय जय प्रभु यीशु की ×2
हमको बचाने आया जगत में, उसकी स्तुति करो
गाओ खुशी के गीत
ओ धरती आकाश, आया मसीह जग में, पाप का करने नाश
पद 1
खून की धारा बहती सूली से, जिसमें धुले सब पाप
धो लो अब तुम अपने हृदय को, जिसमें रहे न दाग
जय जय प्रभु यीशु की...
पद 2
ग्रहण करो तुम आज प्रभु को, प्रेम की बहती धार
उसको बना लो खेवनहार, नाव लगा लो पार
जय जय प्रभु यीशु की...
पद 3
वापस आता मेरा प्रभु जी, ले जायेगा साथ
आशा मेरी अब तो यही है, रहना तुम भी तैयार
जय जय प्रभु यीशु की...
पद 4
हर दम होए साथ यीशु के, खुशी और शांति आराम
आयेगा वह लेने तुम्हें भी, रहना तुम भी तैयार
जय जय प्रभु यीशु की...
"जब यह पंक्ति आती है — “हमको बचाने आया जगत में” — तो मन ठहर-सा जाता है। यह बात लूका 19:10 की याद दिलाती है।"
"जब गीत कहता है — “खून की धारा बहती सूली से” — तो 1 पतरस 1:19 याद आता है।"
"और जब कहा जाता है — “नाव लगा लो पार” — तो मत्ती 14:29 दिल में आता है।"
"वह आया, लहू बहा, और फिर लेने भी आएगा।"
"यह केवल पुराने समय की बात नहीं रह जाती, बल्कि हमारी अपनी कहानी बन जाती है। किसी घर में एक माँ इसे धीरे गाती है, कोई जवान अपनी राह में इसे सुनता है, और कभी पूरी कलीसिया एक साथ गाती है।"
"उस पल लगता है जैसे अलग-अलग आवाज़ें नहीं, एक ही दिल परमेश्वर को पुकार रहा हो। यही इस गीत की खूबसूरती है।"
"आज ग्रहण करो, और तैयार रहो।"
"यह गीत हमें बोझ देने के लिए नहीं, यह याद दिलाने के लिए है कि हम अकेले नहीं हैं।"
"सीख सीधी है। अपना भरोसा केवल अपने ऊपर न रखें।"
"इस सुंदर भजन के लिए दिल से धन्यवाद। आपने इस बात को इतनी सरल हिंदी में गाया कि आराधना में आँखें अपने आप झुक जाती हैं और दिल प्रार्थना में डूब जाता है। आपकी लेखनी और आपकी आवाज़ — दोनों के लिए दिल से आभार। Thank you for giving us a song that touches the heart and leads us into worship."
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो