ईश्वर को धन्य कहते, जिसने बनाया हमको
उसको प्रणाम करते, जिसने बचाया हमको
पद 1
सारी ही आशीषों को, जो दी उसी ने हमको
तुम ही बताओ कैसे, हम भूल सकेंगे उसको
पद 2
तूफान कैसे उठते, जीवन के सागरों में
गर यीशु उनको डाँटे, थम जायेंगे क्षणों में
पद 3
महिमा हो तेरी प्रभुजी, जमीन और आसमां में
हर दिल तुझे पुकारे, होशन्ना हल्लेलुयाह
"जब यह पंक्ति आती है — “धन्य कहते” — तो भजन संहिता 103:1 याद आता है। हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह।"
"जब गीत कहता है — “आशीषों” — तो इफिसियों 1:3 याद आता है। उसने हमें हर प्रकार की आत्मिक आशीष से आशीषित किया।"
"और जब कहा जाता है — “तूफान” — तो मार्क 4:39 दिल में आता है। उसने आँधी को डाँटा।"
"यह गीत धन्य कहने और प्रणाम करने का गीत है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे प्रणाम पास आ गया हो।"
"आशीष, तूफान, और महिमा — यही इस गीत की गहराई है।"
"जब बनाया और बचाया तो धन्य कहो और प्रणाम करो।"
"आशीषें दी हैं तो भूल कैसे सकते हो।"
"तूफान डाँटे तो थम जाते हैं।"
"महिमा हो और हर दिल पुकारे।"
"सीख यह है कि होशन्ना हल्लेलुयाह।"
"इस भजन के शब्द धन्य को इतनी साफ हिंदी में रखते हैं कि सुनते ही प्रणाम की याद आती है।"
"आपकी लेखनी लोगों को आशीष और तूफान की ओर खींचती है।"
"इस गीत को आराधना में रखने वाले सबको दिल से आभार। 🙏"
"Thank you for a song that blesses the Creator and Savior. ❤️"
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो