हो जय जयकार जय जयकार करें
पद 1
वह है हमारा राजा-राजा, दुःख संकट से बचाता-बचाता
हम पर अपनी करुणा करता, और करता उपकार
क्यों न उस पर तन मन हारें, दे अपना अधिकार
पद 2
स्वर्ग है उसका सिंहासन-सिंहासन, पृथ्वी बनी है आसन-आसन
आकाश उसकी महिमा बताए हस्तकला को दिखाए
सारी पृथ्वी उसकी रचना उसका ही है प्रताप
पद 3
उस पर जिसका भरोसा-भरोसा वह तो कभी न गिरेगा-गिरेगा
चाहे बिमारी चाहे गरीबी चाहे हो आकाल
सब संकट से सब कष्टों से हो जायेगा पार
"जब यह पंक्ति आती है — “वह है हमारा राजा” — तो भजन संहिता 47:7 याद आता है। परमेश्वर सारी पृथ्वी का राजा है।"
"जब गीत कहता है — “स्वर्ग है उसका सिंहासन” — तो यशायाह 66:1 याद आता है। स्वर्ग मेरा सिंहासन और पृथ्वी मेरे चरणों की चौकी है।"
"और जब कहा जाता है — “कभी न गिरेगा” — तो भजन संहिता 125:1 दिल में आता है। जो यहोवा पर भरोसा रखते हैं, वे सिय्योन पर्वत के समान हैं, जो कभी टलने का नहीं।"
"यह गीत राजा की जयकार का है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे जयकार पास आ गई हो।"
"करुणा, सिंहासन, और भरोसा — यही इस गीत की गहराई है।"
"राजा संकट से बचाता है।"
"भरोसा रखने वाला नहीं गिरता।"
"सीख सीधी है — तन मन हारो, अधिकार दे दो।"
"इस सुंदर भजन के लिए दिल से धन्यवाद। आपने जयकार को इतनी सरल हिंदी में गाया कि आराधना में दिल प्रार्थना में डूब जाता है। आपकी लेखनी और आपकी आवाज़ — दोनों के लिए दिल से आभार। Thank you for giving us a song that touches the heart and leads us into worship."
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो