हे मेरे मन यहोवा को धन्य-धन्य कहो
जो कुछ भी मुझ में है उसके नाम को धन्य कहो
पद 1
वही तेरे अधर्मों को क्षमा करता है, तेरे सब रोगों को चंगा करता है
वही तो तेरे प्राण को, नाश होने से बचाता है
पद 2
सचनाश के गड़हे से मुझे निकाला
दल-दल की कीच से मुझे उबारा, हल्लेलुयाह
"जब यह पंक्ति आती है — “धन्य कहो” — तो भजन संहिता 103:1 याद आता है। हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह।"
"जब गीत कहता है — “क्षमा” — तो भजन संहिता 103:3 याद आता है। वही तेरे सब अधर्म को क्षमा करता है।"
"और जब कहा जाता है — “उबारा” — तो भजन संहिता 40:2 दिल में आता है। उसने मुझे दलदल की कीच से निकाला।"
"यह गीत मन को धन्य कहने का गीत है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे धन्य पास आ गया हो।"
"अधर्म, रोग, और कीच — यही इस गीत की गहराई है।"
"जब मन धन्य कहे तो नाम को धन्य कहो।"
"अधर्म क्षमा और रोग चंगे करता है।"
"प्राण को नाश से बचाता है।"
"गड़हे और कीच से उबारा।"
"सीख यह है कि हल्लेलुयाह।"
"इस भजन के शब्द धन्य को इतनी साफ हिंदी में रखते हैं कि सुनते ही मन की याद आती है।"
"आपकी लेखनी लोगों को क्षमा और उबारने की ओर खींचती है।"
"इस गीत को आराधना में रखने वाले सबको दिल से आभार। 🙏"
"Thank you for a song that blesses the Lord from the heart. ❤️"
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो