गाऊँ बड़ाई मैं तेरी, यीशु जी मैं तुम पर बलिहारी
पद 1
भूखों की रोटी हो तुम, जीवन देता जल हो तुम
अन्न जल जीवन दाता हो तुम, यीशु जी मैं
पद 2
रोगी की चंगाई हो तुम, दुखियों की शहनाई हो तुम
शांति के राजा हो तुम, यीशु जी मैं
पद 3
निर्धन के धन हो तुम, स्वर्ग से उतरे मन्ना हो तुम
प्रेम का यीशु श्रोत हो तुम, यीशु जी मैं
पद 4
छोड़ तुम्हे अब जाऊँ कहाँ, चैन बता अब पाऊँ कहाँ
अधर्मों के त्राता हो तुम, यीशु जी मैं
पद 5
यीशु प्यारे मुझे बचाओ, मुक्तिदाता प्यास बुझाओ
दीनों के दाता हो तुम, यीशु जी मैं
"जब यह पंक्ति आती है — “बड़ाई” — तो भजन संहिता 34:3 याद आता है। मेरे साथ यहोवा की बड़ाई करो।"
"जब गीत कहता है — “रोटी” — तो यूहन्ना 6:35 याद आता है। मैं जीवन की रोटी हूँ।"
"और जब कहा जाता है — “चंगाई” — तो यशायाह 53:5 दिल में आता है। उसके कोड़े खाने से हम चंगे हुए।"
"यह गीत बड़ाई गाने और बलिहारी होने का गीत है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे बड़ाई पास आ गई हो।"
"रोटी, शांति, और त्राता — यही इस गीत की गहराई है।"
"जब बड़ाई गाओ तो बलिहारी हो।"
"रोटी और जल हो तुम।"
"चंगाई और शांति के राजा।"
"धन और मन्ना।"
"सीख यह है कि त्राता और दाता।"
"इस भजन के शब्द बड़ाई को इतनी साफ हिंदी में रखते हैं कि सुनते ही बलिहारी की याद आती है।"
"आपकी लेखनी लोगों को रोटी और चंगाई की ओर खींचती है।"
"इस गीत को आराधना में रखने वाले सबको दिल से आभार। 🙏"
"Thank you for a song of magnifying the Lord. ❤️"
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो