दुनिया का डेरा छोड़ कर एक दिन
पहुँचूंगा मैं अनंत घर
गाऊँगा खुशी से वहाँ जय गान
क्लेशों पर जयवंत होकर
पद 1
दुनिया का सुख न चाहूँ, धन और दौलत न चाहूँ
चलना मुझे है यीशु के कदमों पर
सर्वस्य करता तुझे अर्पण, जग के विधता प्रभुवर
दुनिया का
पद 2
नफरत से मेरे अपने मुझ से अपना मुँह मोड़े, ठुकरा के मुझे गैरों की तरह
अपने यीशु की बाहों में रहूँगा मैं हर पल
दुनिया का
पद 3
धरती और सारी सृष्टि निश्चित उस दिन बदलेगी
होगा प्रभु से जब मेरा मिलन (2)
जाऊँगा पक्षी के समान उड़कर
होगा महिमा में रूपान्तर
दुनिया का
"जब यह पंक्ति आती है — “अनंत घर” — तो यूहन्ना 14:2 याद आता है। मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं।"
"जब गीत कहता है — “जयवंत” — तो रोमियों 8:37 याद आता है। हम इन सब बातों में जयवन्त से भी बढ़कर हैं।"
"और जब कहा जाता है — “रूपान्तर” — तो 1 कुरिन्थियों 15:52 दिल में आता है। हम सब बदल जाएंगे।"
"यह गीत डेरा छोड़ कर अनंत घर जाने का गीत है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे अनंत पास आ गया हो।"
"सुख, बाहों, और मिलन — यही इस गीत की गहराई है।"
"जब डेरा छोड़ो तो अनंत घर पहुँचोगे।"
"सुख न चाहूँ कदमों पर चलूँ।"
"नफरत से मोड़ें तो बाहों में रहूँगा।"
"मिलन होगा और रूपान्तर।"
"सीख यह है कि जयवंत होकर।"
"इस भजन के शब्द डेरा को इतनी साफ हिंदी में रखते हैं कि सुनते ही अनंत की याद आती है।"
"आपकी लेखनी लोगों को कदमों और रूपान्तर की ओर खींचती है।"
"इस गीत को आराधना में रखने वाले सबको दिल से आभार। 🙏"
"Thank you for a song of leaving the world for the eternal home. ❤️"
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो