टेक
धन्यवाद सदा प्रभु ख्रीष्ट तुझे, तेरे सम्मुख शीश नवाते हैं
हम तेरी आराधना करने को, मन्दिर में तेरे आते हैं
धन्यवाद सदा
पद 1
धन्य बीरों का इस मण्डली के, तेरे नाम पे जो बलिदान हुए (2)
हम उनके साहस त्याग को लें, नित्य आगे बढ़ते जाते हैं
धन्यवाद सदा
पद 2
अपराध क्षमा कर दयानिधि, बल पौरुष दे अगुवाई कर (2)
फिर अपने तन मन जीवन को, वेदी पर आज चढ़ाते हैं
धन्यवाद सदा
पद 3
जिस क्रूस पर तेरा रक्त बहा, संसार के पापी जन के लिए (2)
उस क्रूस ध्वजा से प्रेम तेरा (2) हम दुनिया में फैलाते हैं
धन्यवाद सदा
"जब यह पंक्ति आती है — “मन्दिर में तेरे आते हैं” — तो भजन संहिता 100:4 याद आता है। उसके फाटकों से धन्यवाद, और उसके आंगनों में स्तुति के साथ प्रवेश करो।"
"जब गीत कहता है — “वेदी पर आज चढ़ाते हैं” — तो रोमियों 12:1 याद आता है। अपनी देहों को जीवित, पवित्र और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ।"
"और जब कहा जाता है — “जिस क्रूस पर तेरा रक्त बहा” — तो 1 पतरस 1:18-19 दिल में आता है। तुम चाँदी वा सोने से नहीं, मसीह के अनमोल लहू से छुड़ाए गए हो।"
"यह गीत मन्दिर में आकर शीश नवाते हुए धन्यवाद का गीत है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे वेदी पास आ गई हो।"
"बीरों का साहस, क्षमा की पुकार, और क्रूस की ध्वजा — यही इस गीत की गहराई है।"
"आराधना के लिये मन्दिर में आओ।"
"तन मन जीवन वेदी पर चढ़ाओ।"
"सीख सीधी है — उसके प्रेम को दुनिया में फैलाओ।"
"इस सुंदर भजन के लिए दिल से धन्यवाद। आपने मन्दिर की आराधना को इतनी सरल हिंदी में गाया कि आराधना में दिल प्रार्थना में डूब जाता है। आपकी लेखनी और आपकी आवाज़ — दोनों के लिए दिल से आभार। Thank you for giving us a song that touches the heart and leads us into worship."
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो