देख मैंने तेरा चित्र अपनी हथेली पर खोद कर बनाया है (2)
माँ चाहे भूल जाए जन्माए हथेले को, मैं तुझे कभी नहीं भूलूँगा (2)
पद 1
दुनिया के खतरों में, हर परेशानी में
मैं तुझे सम्भालूँगा (2)
देख मैंने
पद 2
न तुझे छोड़ूँगा मैं, न तुझे त्यागूँगा
मैं तुझे सम्भालूँगा (2)
देख मैंने
पद 3
तुझे भूल सकते हैं, तेरे अपने ही
मैं तुझे कभी नहीं भूलूँगा (2)
देख मैंने
पद 4
दुनिया ने छोड़ दिया एकलौते बेटे को
मैं तुझे कभी नहीं छोड़ूँगा (2)
देख मैंने
"जब यह पंक्ति आती है — “हथेली पर” — तो यशायाह 49:16 याद आता है। देख, मैंने तुझे अपनी हथेलियों पर खोद रखा है।"
"जब गीत कहता है — “नहीं भूलूँगा” — तो यशायाह 49:15 याद आता है। क्या माता अपने दूधमुँहे बच्चे को भूल सकती है।"
"और जब कहा जाता है — “सम्भालूँगा” — तो यशायाह 41:10 दिल में आता है। मैं तुझे सम्भालूँगा।"
"यह गीत हथेली पर चित्र खोदने और न भूलने का गीत है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे हथेली पास आ गई हो।"
"खतरे, भूलना, और छोड़ना — यही इस गीत की गहराई है।"
"जब हथेली पर खोद दिया तो माँ भूल जाए तो भी नहीं भूलूँगा।"
"खतरों और परेशानी में सम्भालूँगा।"
"छोड़ूँगा नहीं और त्यागूँगा नहीं।"
"अपने भूल सकते हैं लेकिन मैं नहीं भूलूँगा।"
"सीख यह है कि एकलौते को दुनिया ने छोड़ा लेकिन मैं नहीं छोड़ूँगा।"
"इस भजन के शब्द हथेली को इतनी साफ हिंदी में रखते हैं कि सुनते ही चित्र याद आता है।"
"आपकी लेखनी लोगों को सम्भालने और न छोड़ने की ओर खींचती है।"
"इस गीत को आराधना में रखने वाले सबको दिल से आभार। 🙏"
"Thank you for a song that engraves us on His palms. ❤️"
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो