बोझ सबके गुनाह का उठाकर, वो लिये जा रहा है
पद 1
ताज काँटों का सिर पर पहनाया
किस बेदर्दी से उसको सताया (2)
कैसे गिर-गिर के जाता था यीशु
क्यों खून उसका बहाया
पद 2
क्या खाता थी हमारे मसीह की
जालिमों ने उसे ये सजा दी
ठोंक दी उसके हाथों में कीलें
फिर भी यीशु ने उनको दुआ दी
पद 3
सूली पर था मसीह बेसहारा
उसकी पसली में जब भाला मारा
बह चली थी लहू की जो धारा
है उसी में सभी का कफारा
"जब यह पंक्ति आती है — “बोझ सबके गुनाह का” — तो यशायाह 53:4 याद आता है। निश्चय उसने हमारे ही रोगों को सह लिया और हमारे ही दुखों को उठा लिया।"
"जब गीत कहता है — “काँटों का ताज” — तो मत्ती 27:29 याद आता है। उन्होंने काँटों का मुकुट गूँथकर उसके सिर पर रखा।"
"और जब कहा जाता है — “लहू की जो धारा” — तो इब्रानियों 9:22 दिल में आता है। बिना लहू बहाए क्षमा नहीं होती।"
"यह गीत गुनाह का बोझ उठाकर सूली की ओर जाते यीशु का गीत है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे कफारा पास आ गया हो।"
"काँटे, कीलें, और लहू — यही इस गीत की गहराई है।"
"वह बोझ उठाकर ले जा रहा है।"
"कीलें ठोंकने वालों को दुआ दी।"
"सीख सीधी है — लहू में सभी का कफारा है।"
"इस गीत के शब्द बोझ उठाने को इतनी गहरी हिंदी में कहते हैं कि सुनते ही दिल झुक जाता है।"
"आपकी गायकी लोगों को काँटों, कीलों और लहू की धारा की याद दिलाती है, और कफारे की ओर खींचती है।"
"इस भजन को मन से गाने वाले हर भाई-बहन को दिल से आभार। 🙏"
"Thank you for a song that shows the burden He carried. ❤️"
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो