बिन तेरे मैं कुछ भी नहीं ×2
यहोवा मुझे तेरी जरूरत है ×2
प्यार तू करता इतना ×2
अपने हाथों पे खोदी मेरी सूरत है
यहोवा मुझे तेरी जरूरत है ×2
पद 1
तू मेरे चहरे की रौनक और है मेरी कुव्वत ×2
हसमत और जलाल के बादशाह तुझसे है मेरी झीनत ×2
तेरे बिना ये जिंदगी मेरी ×2
बे रौनक बे सूरत है
पद 2
तेरा कलाम है ऐसे, जैसे हो अनमोल मोती ×2
चिराग है कदमो के लिए और मेरी राहो की ज्योति
साहेजमा तू ज़िंदा खुदा है ×2
तू ना जूठी सूरत है
पद 3
आसमा तूने बनाया, समुन्दर की हद ठहराई ×2
चरिंद परिंद पहाड़ दरिया और फूलों से धरती सजाई ×2
कायनात इतनी सुंदर बनाई ×2
तू खुद कितना खूब सूरत है
जब यह पंक्ति आती है — “अपने हाथों पर खोदी मेरी सूरत है” — तो मन ठहर-सा जाता है। यह बात यशायाह 49:16 की याद दिलाती है, जहाँ लिखा है — “देख, मैंने तेरा चित्र अपनी हथेलियों पर खोदा है।”
जब गीत कहता है — “बिन तेरे मैं कुछ भी नहीं”, तो यूहन्ना 15:5 याद आता है। यीशु ने कहा — “मुझसे अलग होकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते।”
और जब गीत कहता है — “तेरा कलाम मेरी राह की ज्योति है”, तो भजन संहिता 119:105 याद आता है — “तेरा वचन मेरे पाँव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है।”
यह गीत केवल आज की आराधना का हिस्सा नहीं है। इसके पीछे वही पुराना विश्वास है, जो परमेश्वर के लोगों के दिलों में पीढ़ियों से रहा है — परमेश्वर अपने लोगों को नहीं भूलता।
यशायाह के दिनों में जब लोग कठिन समय से गुजर रहे थे, तब उनके मन में भी सवाल उठे होंगे — “क्या यहोवा हमें भूल गया है?” लेकिन परमेश्वर ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वह उन्हें भूला नहीं है। उनकी याद उसके सामने बनी हुई है।
शायद इसी वजह से आज जब कोई इस गीत को गाता है और कहता है, “बिन तेरे मैं कुछ भी नहीं,” तो ये शब्द सीधे दिल तक पहुँचते हैं। यह केवल पुराने समय की बात नहीं रह जाती, बल्कि हमारी अपनी कहानी बन जाती है।
किसी घर में एक माँ इसे धीरे-धीरे गाती है, कोई जवान अपनी परेशानी में इसे सुनता है, और कभी पूरी कलीसिया एक साथ इसे गाती है। उस पल लगता है जैसे अलग-अलग आवाज़ें नहीं, बल्कि एक ही दिल परमेश्वर को पुकार रहा हो।
यही इस गीत की खूबसूरती है — यह मंच पर गाया जाने वाला गीत भर नहीं, बल्कि परमेश्वर के सामने झुके हुए दिल की आवाज़ बन जाता है।
हम अक्सर सोचते हैं कि अपनी समझ और अपनी ताकत के सहारे जिंदगी की हर राह पार कर लेंगे। लेकिन जिंदगी में कुछ ऐसे मोड़ भी आते हैं, जहाँ इंसान को एहसास होता है कि उसे अपने से कहीं बड़ी शक्ति की जरूरत है।
यही एहसास इस गीत की पंक्ति “बिन तेरे मैं कुछ भी नहीं” दिल में उतार देती है।
यह गीत हमें अपनी कमजोरी याद दिलाने के लिए नहीं, बल्कि यह याद दिलाने के लिए है कि हम अकेले नहीं हैं। जब रास्ता धुंधला हो, उसका वचन रोशनी बन सकता है। जब मन थक जाए, उसका सहारा मिल सकता है। और जब सब कुछ ठीक चल रहा हो, तब भी उसकी कृपा को भूलना नहीं चाहिए।
इस गीत की सीख बहुत सीधी है — अपने जीवन का भरोसा केवल अपने ऊपर न रखें। परमेश्वर को हर कदम में याद रखें और उसकी राह पर चलने की कोशिश करें।
क्योंकि आखिर में बात इतनी-सी है — “मेरे पास सब कुछ हो सकता है, लेकिन अगर तू मेरे साथ नहीं, तो मेरे पास सच में कुछ भी नहीं।”
इस सुंदर भजन के लिए दिल से धन्यवाद।
आपने यशायाह की बात को इतनी सरल और सहज हिंदी में प्रस्तुत किया कि आराधना में आँखें अपने आप झुक जाती हैं और दिल प्रार्थना में डूब जाता है।
आपकी लेखनी और आपकी आवाज़ — दोनों के लिए दिल से आभार।
यह गीत बहुतों के लिए सिर्फ एक भजन नहीं, बल्कि एक प्रार्थना बन गया है।
Thank you for giving us a song that touches the heart and leads us into worship.
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो