बन्दना करते हैं हम, हृदय को तेरे सामने (2)
लाकर रखते हैं हम, बन्दना करते हैं हम
पद 1
हृदय मेरे मसीहा, जीवन दीप जलाओ
हृदय के पापों को धोकर, प्रेम की राह दिखाओ (2)
पद 2
मैं हूँ निर्बल मानव, पापों के सागर में खोया (2)
अब तुम सम्भालो यीशु जी भवसागर में हूँ खोया (2)
पद 3
शक्ति दे दो मुझको, मेरा नहीं कोई मीत
जीवन को मेरे ले ले, गाऊँ तेरे गीत (2)
"जब यह पंक्ति आती है — “हृदय को तेरे सामने” — तो भजन संहिता 51:17 याद आता है। भग्न और पिसे हुए मन का बलिदान तू तुच्छ नहीं जानता।"
"जब गीत कहता है — “पापों को धोकर” — तो भजन संहिता 51:2 याद आता है। मुझे भली भाँति धो, कि मैं पवित्र हो जाऊँ।"
"और जब कहा जाता है — “भवसागर में हूँ खोया” — तो भजन संहिता 69:1 दिल में आता है। हे परमेश्वर, मुझे बचा, क्योंकि जल मेरे प्राण तक आ गए हैं।"
"यह गीत हृदय को सामने रखकर बन्दना करने का गीत है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे दीप पास आ गया हो।"
"धोना, सम्भालना, और गीत — यही इस गीत की गहराई है।"
"बन्दना हृदय सामने लाकर होती है।"
"निर्बल को वह सम्भालता है।"
"सीख सीधी है — जीवन दे दो, और उसका गीत गाओ।"
"इस सुंदर भजन के लिए दिल से धन्यवाद। आपने बन्दना को इतनी सरल हिंदी में गाया कि आराधना में दिल प्रार्थना में डूब जाता है। आपकी लेखनी और आपकी आवाज़ — दोनों के लिए दिल से आभार। Thank you for giving us a song that touches the heart and leads us into worship."
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो