आया है यीशु आया है
मुक्ति लेकर आया है
पद 1
पूरब देश से चले मजूसी ×2 तारे से देखो तारे से
पता यीशु का पाया है ×2
ओहो आया...
पद 2
यरूशलेम जा पूछन लागे, किस घर जी राजा किस घर जी ×2
मुक्ति का राजा आया है ×2
ओहो आया...
पद 3
जंगल में मंगल दूत मिल गाते ×2 जय जय हो प्रभु जय जय हो ×2
शान्ति मेल लाया है ×2
ओहो आया...
पद 4
देखन गड़रिये चले रात में ×2 दूतों से सुनके दूतों से ×2
मसीह मरियम का जाया है ×2
ओहो आया...
पद 5
दास सुना जब प्रेम मसीह का ×2 तन मन से लोगों, तन मन से ×2
शरण यीशु की आया है ×2
ओहो आया...
जब यह पंक्ति आती है — “आया है यीशु आया है” — तो दिल रुक-सा जाता है। यह बात मत्ती 2:1-2 की याद दिलाती है। पूरब से ज्योतिषी आकर पूछने लगे, यहूदियों का राजा कहाँ है जो जन्मा है।
जब गीत कहता है — “शान्ति मेल लाया है” — तो लूका 2:14 याद आता है। पृथ्वी पर उन मनुष्यों में शान्ति हो, जिनसे परमेश्वर प्रसन्न है।
और जब कहा जाता है — “शरण यीशु की आया है” — तो मत्ती 11:28 दिल में आता है। हे सब परिश्रम करने वालो, मेरे पास आओ।
यह गीत केवल पुरानी यात्रा की बात नहीं है। मजूसी तारे के पीछे चले, गड़रिये रात में चले, और दास प्रेम सुनकर शरण में आया। वही बुलाहट आज भी है।
यह केवल पुराने समय की बात नहीं रह जाती, बल्कि हमारी अपनी कहानी बन जाती है। वह दूर देश से नहीं, द्वार तक आया है।
किसी घर में एक माँ इसे धीरे गाती है, कोई जवान रात में इसे सुनता है, और कभी पूरी कलीसिया कहती है, ओहो आया।
उस पल एक ही दिल परमेश्वर को पुकार रहा होता है। यही इस गीत की खूबसूरती है। यह मंच का गीत भर नहीं, झुके हुए दिल की आवाज़ है।
हम अक्सर सोचते हैं कि उसे ढूँढना हमारे बस की बात है। यह गीत कहता है, वह खुद आया है। मुक्ति लेकर आया है।
यह गीत हमें राह भटकाने के लिए नहीं, यह याद दिलाने के लिए है कि शरण तैयार है।
सीख सीधी है। तारे की तरह मत भटकना। उसके पास आओ, और शरण लो।
इस सुंदर भजन के लिए दिल से धन्यवाद। आपने उसके आने की बात को इतनी सरल हिंदी में गाया कि आँखें अपने आप झुक जाती हैं। आपकी लेखनी और आपकी आवाज़ — दोनों के लिए दिल से आभार। Thank you for giving us a song that touches the heart and leads us into worship.
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो