आ रूहे आ, रूहे आ, रूहे आ (2)
रूहे पाक खुदावन्द आ तू आ
जान, जिस्म और रूह मैं तू बस जा
आ रूहे आ
पद 1
रूह के शोले लपक-लपक जब आते हैं
टूट के सारे बन्धन गिरते जाते हैं
आ रूहे आ
पद 2
बारिश होगी रूहे पाक के बादल से
धुलियेंगे मैले मन अन्दर से
आ रूहे आ
पद 3
रूह की सूरत में जब यीशु आयेगा
तहस-नहस होगा शैतान गिर जायेगा
आ रूहे आ
"जब यह पंक्ति आती है — “रूहे पाक” — तो प्रेरितों के काम 2:4 याद आता है। वे सब पवित्र आत्मा से भर गए।"
"जब गीत कहता है — “शोले” — तो प्रेरितों के काम 2:3 याद आता है। आग की सी जीभें दिखाई दीं।"
"और जब कहा जाता है — “बन्धन” — तो लूका 4:18 दिल में आता है। बन्दियों को छुटकारे का प्रचार करूँ।"
"यह गीत रूहे पाक को आने की पुकार है।"
"किसी प्रार्थना सभा में भाई-बहन इसे गाते हैं, कोई अकेला कमरे में बैठकर गुनगुनाता है, और लगता है जैसे शोले पास आ गए हों।"
"बन्धन, बारिश, और शैतान — यही इस गीत की गहराई है।"
"जब रूहे आ तो जान, जिस्म और रूह में बस जा।"
"शोले आते हैं तो बन्धन टूटते हैं।"
"बारिश से मैले मन धुलते हैं।"
"रूह की सूरत में आएगा तो शैतान गिर जाएगा।"
"सीख यह है कि आ रूहे आ।"
"इस भजन के शब्द रूहे को इतनी साफ हिंदी में बुलाते हैं कि सुनते ही शोले याद आते हैं।"
"आपकी गायकी लोगों को बन्धन टूटने और मन धुलने की ओर खींचती है।"
"इस गीत को आराधना में रखने वाले सबको दिल से आभार। 🙏"
"Thank you for a song that invites the Holy Spirit. ❤️"
Kidhar Ja Rahe Ho
किधर जा रहे हो